फागुन गीत

रंगीला फागुन आया
खेलो रंग अबीर गुलाल, रंगीला फागुन आया
सारे टेसू हो गये लाल, रंगीला फागुन आया
ली भर-भर कर पिचकारी, एक दूजे को मारी !
लो मच गया खूब धमाल, रंगीला फागुन आया
खेलो रंग अबीर गुलाल, रंगीला फागुन आया
सब तन-मन से हैं गीले और चेहरे नीले-पीले !
है हर कोई बे-हाल, रंगीला फागुन आया
खेलो रंग अबीर गुलाल, रंगीला फागुन आया
वो हुड़दंगों की मस्ती, रंगीली हो गयी बस्ती ।
नहीं बचने की कोई मजाल, रंगीला फागुन आया
खेलो रंग अबीर गुलाल, रंगीला फागुन आया
कोई तासे ढोल बजावे, कोई भांग छान कर लावे ।
किसी की बहक रही है चाल, रंगीला फागुन आया
खेलो रंग अबीर गुलाल, रंगीला फागुन आया
क्या अपने और पराये, रंग डाले गले लगाये ।
दुश्मनी भूल गये यशपाल, रंगीला फागुन आया
खेलो रंग अबीर गुलाल, रंगीला फागुन आया
खेलो रंग अबीर गुलाल, रंगीला फागुन आया
सारे टेसू हो गये लाल, रंगीला फागुन आया
-यशपाल सिंह 'रवि`
एस.पी.एम., होशंगाबाद

